Foreign Tour

यात्रा …

कही दूर या एक स्थान से दूसरे स्थान जाते समय यात्रा विचार कर जाने से आपको किसी अनहोनी से बचा सकता है वैसे जो किस्मत में लिखी है वो तो तय है लेकिन हिंदुस्तान में प्राचीन ऋषियों ने उपाय बताएं है उसमे कुछ परिवर्तन किया जा सकता है
यात्रा कभी इतनी सुखद होती है कि दौड़-धूप भरी जिंदगी की सभी थकान दूर हो जाती है। कभी यात्रियों को दुर्घटना के कारण जान भी गंवानी पड़ जाती है। आखिर क्या है इसका रहस्य?
शायद सही मुहूर्त का चुनाव। समय का अभाव होने के कारण लोग प्रायः मुहूर्त के महत्व को भूल जाते हैं। मुहूर्त की तब याद आती है जब यात्रा निरर्थक, निष्फल एवं नुकसान दायक साबित होती है। तब व्यक्ति इस बात को सोचने को मजबूर हो जाता है कि काश मैंने अपनी यात्रा शुभ मुहूर्त में प्रारंभ की होती तो होने वाली हानि, मानसिक या शारीरिक कष्ट यात्रा में न सहने पड़ते।
यदि हम यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व मुहूर्त का विचार करते हुए अपनी योजना को बनाएं तो बहुत मुमकिन है कि यात्रा एवं प्रवास के दौरान मानसिक तथा शारीरिक कष्ट से मुक्ति मिल जाए तथा हमारी यात्रा के उद्देश्य में सफलता प्राप्त हो।
यात्रा मुहूर्त के लिए दिषाशूल, नक्षत्रशूल, भद्रा, चंद्रबल, ताराबल, राहु काल आदि का विचार किया जाता है।
किसी भी यात्रा मुहूर्त को निकालने के लिए सर्वप्रथम तिथिशुद्धि का विचार किया जाता है।
तिथिशुद्धि: यात्रा के लिए निम्न तिथियां शुभ मानी जाती हैं। किसी भी पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी एवं केवल कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथियां। यहां यह बात ध्यान रखने योग्य है कि इन तिथियों में भद्रादोष नहीं होना चाहिए।
अर्थात इन तिथियों में यदि विष्टि करण होगा तो वह समय यात्रा के लिए शुभ नहीं होगा।
नक्षत्र शुद्धि: तिथि शुद्धि करने के पश्चात ली गई तिथियों का नक्षत्र विचार किया जाता है।

यात्रा के लिए शुभ नक्षत्र निम्नलिखित हैं: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा एवं रेवती नक्षत्र उत्तम माने गए हैं।
इनके अतिरिक्त कुछ नक्षत्रों में सभी दिशाओं में यात्रा की जाती है।
अर्थात सभी दिशाओं में यात्रा करना जिन नक्षत्रों में शुभ होता है, वे निम्नलिखित हैं – अश्विनी, पुष्य, अनुराधा और हस्त। अंत में कुछ नक्षत्र ऐसे हैं जो यात्रा के लिए मध्यम श्रेणी के माने जाते हैं। वे निम्नलिखित हैं:
रोहिणी, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्ताराषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, ज्येष्ठा, मूल एवं शतभिषा।

चैघड़िया विचार:
नक्षत्र शुद्धि करने के उपरांत शुद्ध तिथियों के दिन चैघड़िया विचार किया जाता है। एक चैघड़िया का समय चार घटी होता है अर्थात डेढ़ घंटे का समय होता है। इस शुभ चैघड़िया के दौरान यात्रा करना शुभ फलदायक एवं यात्रा सुखद होती है। कुल आठ चैघड़ियों में से चार चैघड़ियां शुभ होती हैं जिनके नाम हैं- अमृत, चर, लाभ एवं शुभ।

होरा विचार: शुभ चैघड़िया के उपरांत शुभ ग्रह की होरा का विचार भी किया जाता है।
जैसा कि हम जानते हैं, शुभ ग्रह चार होते हैं- चंद्र, बुध, गुरु और शुक्र। इन ग्रहों की होरा में यात्रा करना श्रेष्ठ माना जाता है।

चंद्रबल विचार: यात्रा के दिन चंद्रमा का शुभ राशि में होना भी आवश्यक है। अर्थात जिस व्यक्ति को यात्रा करनी है उसकी जन्म राशि ज्ञात होनी चाहिए। जातक की जन्म राशि से यात्रा करने वाले दिन चंद्रमा की राशि 4, 8, 12 नहीं होनी चाहिए।
दूसरे शब्दों में गोचर का चंद्रमा जातक की जन्म राशि से चैथे, आठवें, बारहवें भाव में नहीं होना चाहिए।

लग्न विचार: उपरोक्त शुद्धियों के पश्चात जबकि यात्रा का दिन निश्चित किया जा चुका है, उसके उपरांत किस शुभ लग्न में यात्रा करनी चाहिए यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसके लिए हमें यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि कभी भी कुंभ लग्न में या कुंभ के नवांश में यात्रा नहीं करनी है। लग्न शुद्धि इस प्रकार करनी चाहिए कि 1, 4, 5, 7, 10वें भावों में शुभ ग्रह हों तथा लग्न से 3, 6, 10 एवं 11वें भाव में पाप ग्रह स्थित हों।

यदि चंद्रमा लग्न से 1, 6, 8 या 12वें भाव में स्थित होगा तो वह लग्न अशुभ होगा। यह चंद्रमा पापग्रह से युक्त होगा तो भी अशुभ माना जाएगा।

राहुकाल- राहुकाल में शुभकार्य करना वर्जित हैं। ऐसा माना जाता है कि यह समय क्रुर ग्रह राहु के नाम से है जो पाप ग्रह माना गया है। इसलिए इस समय में जो भी कार्य किया जाता है वो पाप ग्रस्त हो जाता है और असफल हो जाता है।
रविवार को शाम 04:30 से 06 बजे तक राहुकाल होता है।
सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानि सुबह 07:30 से 09 बजे तक राहुकाल होता है।
मंगलवार को दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक राहुकाल होता है।
बुधवार को दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक राहुकाल माना गया है।
गुरुवार को दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक का समय यानि दिन का छठा भाग राहुकाल होता है।
शुक्रवार को दिन का चौथा भाग राहुकाल होता है। यानि सुबह 10:30 बजे से 12 बजे तक का समय राहुकाल है।
शनिवार को सुबह 09 बजे से 10:30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है।

कई बार हम कही घर से बहार जाते है और हमें बिना कारन ही परेशानी होती है ,
वो दिशा शूल होता है , आप अपनी यात्रा को सुखद पूर्वक और मंगलमय बनाने के लिए ये उपाय करे –
सोमवार और शनिवार को पूर्व (East) दिशा
रविवार और शुक्रवार को पश्चिम (West) दिशा
मंगल वार और बुधवार को उत्तर (North( दिशा
गुरु वार को दक्षिण (South) दिशा
सोमवार और गुरूवार को (अग्ने ) south east
रविवार और शुक्रवार को (नेतरअगये ) south west
मंगलवार को (वायवे ) north west
बुध और शनि को (ईशान ) north east
दिशा शूल होता है| अर्थात इस दिन इन दिशायो की और यात्रा नहीं करनी चाहिए|बुध को उत्तर दिशा का स्वामी होते हुए भी बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा निषिद है|
दिशा शूल से बचा जा सकता है और आप अपनी यात्रा को मंगलमय बना सकते है|
रविवार = दलिया और घी खा करे जाये .
सोमवार = दर्पण देख कर जाये .
मंगलवार = गुड खा कर जाये .
बुधवार = धनिया या तिल खा कर जाये .
वीरवार = दही खा कर जाये .
शुक्रवार = जों खा कर जाये .
शनिवार = अदरक या उड़द खा कर जाये .